'भालसरिक गाछ' जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल अखनो ५ जुलाई २००४ क पोस्ट'भालसरिक गाछ'- केर रूपमे इंटरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितिक रूपमे विद्यमान अछि जे विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,आ http://www.videha.co.in/पर ई प्रकाशित होइत अछि।
भालसरिक गाछ/ विदेह- इन्टरनेट (अंतर्जाल) पर मैथिलीक पहिल उपस्थिति
भालसरिक गाछ/ विदेह- इन्टरनेट (अंतर्जाल) पर मैथिलीक पहिल उपस्थिति
(c) २०००-२०२२ सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/.../bhalsarik_gachh.html , http://www.geocities.com/ggajendra आदि लिंकपर आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha 258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर) केर रूपमे इन्टरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितक रूपमे विद्यमान अछि। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ "विदेह" पड़लै। इंटरनेटपर मैथिलीक पहिल उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि, जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA
(c)२०००-२०२२. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: डॉ उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक -स्त्री कोना- इरा मल्लिक।
रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि,'विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।
स्थायी स्तम्भ जेना मिथिला-रत्न, मिथिलाक खोज, विदेह पेटार आ सूचना-संपर्क-अन्वेषण सभ अंकमे समान अछि, ताहि हेतु ई सभ स्तम्भ सभ अंकमे नइ देल जाइत अछि, ई सभ स्तम्भ देखबा लेल क्लिक करू नीचाँ देल विदेहक 346म आ 347 म अंक, ऐ दुनू अंकमे सम्मिलित रूपेँ ई सभ स्तम्भ देल गेल अछि।
|
“विदेह” ई-पत्रिका: देवनागरी वर्सन |
“विदेह” ई-पत्रिका: मिथिलाक्षर वर्सन |
“विदेह” ई-पत्रिका: मैथिली-IPA वर्सन |
“विदेह” ई-पत्रिका: मैथिली-ब्रेल वर्सन |
Sunday, July 27, 2008
विदेह 01 मई 2008 वर्ष 1 मास 5 अंक 9 5. कथा9.पसीधक काँट
9. पसीधक काँट
मीत भाइक खिस्सा की कहब। गामसँ निकललथि नोकरी करबाक हेतु मुदा यावत लाल काकाक लग रहलाह तावत कनैत-कनैत हुनका अकच्छ क’ देलखिन्ह।
-----------------------------------------------------------------------
मीत भाइ गाममे रहथि तँ पसीधक काँटक रस पोखड़िमे द’ कए पोखरिक सभटा माँछ मारि देथि।
एक बेर पुबाड़ि टोलक कोनो बच्चाक मोन खराप भेलैक तँ हिनका सँ अएलन्हि पुछबाक हेतु जे कोन दबाइ दियैक। मीत भाइ पसीधक काँटक रस पियाबय कहलखिन्ह। फेर मँहीस चरेबाक हेतु डीह दिशि चलि गेलाह। एक गोट दोसर मँहीसबार गाम परसँ अबैत देखा’ पड़लन्हि तँ पुछलखिन्ह जे हौ बाउ, पुबाड़ि टोल दिशि सँ कोनो कन्नारोहटो सुनि पड़ल छल अबैत काल? बुझू। ओ’ तँ धन रहल जे मरीजक बापकेँ रस्तामे क्यो भेँटि गेलैक आ’ पूछि देलकैक, नहि तँ अपन बच्चासँ हाथ धोबय जा’ रहल छल।
फेर मीत भाइ कंठी ल’ लेलन्हि, मुदा घरमे सभ क्यो माँछ खूब खाइत छलन्हि। एक बेर भोरे- भोर खेत दिशि कोदारि आ’ छिट्टा लए बिदा भेलाह मीत भाइ। बुन्ना-बान्नी होइत छल, मुदा आड़िकेँ तड़पैत एकटा पैघ रोहुकेँ देखि कए कोदारि चला देलन्हि आ’ रोहु दू कुट्टी भ’ गेल। दुनू ट्कड़ीकेँ माथ पर उठा कए विदा भेलाह मीत भाइ गाम दिशि। तकरा देखि गोनर भाय गाम पर जाइत काल बाबा दोगही लग ठमकि कए ठाढ़ भए गेलाह, मोनमे ई सोचैत जे वैष्णव जीसँ रोहु कोना कए लए ली। आ’ ‘बाबा दोगही’ मीत भाइक टोलकेँ गौँआ सभ ताहि हेतु कहैत छल, जे क्यो बच्चो जे ओहि टोलमे जनमैत छ्ल से संबंधमे गौँआ सभक बाबा होइत छल।
“यौ मीत भाइ। ई की कएलहुँ। वैष्णव भ’ कए माछ उघैत छी”।
”यौ माछा खायब ने छोड़ने छियैक। मारनाइ तँ नञि ने”।
अपन सनक मुँह लए गोनर भाइ विदा भए गेलाह।
से एक दिन गोनर झा टेलीफोन डायरी देखि रहल छलाह, तँ हुनका देखि मीत भाइ पुछलखिन्ह, “की देखि रहल छी”।
गोनर झा कहलखिन्ह जे “टेलीफोन नंबर सभ लिखि कए रखने छी, ताहिमे सँ एकटा नंबर ताकि रहल छी”।
“ आ’ जौँ बाहरमे रस्तामे कतहु पुलिस पूछि देत जे ई की रखने छी तखन”।
“ ऐँ यौ से की कहैत छी। टेलीफोन नंबर सभ सेहो लोक नहि राखय”।
”से तँ ठीक मुदा एतेक नंबर किएक रखने छी पुछला पर जौँ जबाब नहि देब तँ आतंकी बुझि जेलमे नहि धए देत”।
”से कोना धए देत। एखने हम एहि डायरीकेँ टुकड़ी-टुकड़ी क’ कए फेंकि दैत छियैक”।
आ’ से कहि गोनर भाइ ओहि डायरीकेँ पाड़-फूड़ि कए फेंकि देलखिन्ह।
एक दिन मीत भाए भोरे-भोर पोखड़ि दिशि जाइत रहथि तँ जगन्नाथ भेटलखिन्ह, गोबड़ काढ़ि रहल छलाह। कहलखिन्ह,” यौ मीत भाइ, अहूँ सभकेँ भोरे-भोर गोबड़ काढ़य पड़ैत अछि ?”
मीत भाइ देखलन्हि जे हुनकर कनियो ठाढ़ि छलखिन्ह से एखन किछु कहबन्हि तँ लाज होएतन्हि, से बिनु किछु कहने आगू बढ़ि गेलाह। जखन घुरलाह तँ एकान्त पाबि जगन्नाथकेँ पुछलखिन्ह, “भाइ, पहिने बियाहमे पाइ देबय पड़ैत छलैक, से अहाँकेँ सेहो लागल होयत। ताहि द्वारे ने उमरिगरमे बियाह भेल”।
”हँ से तँ पाइ लागले छल”।
”मुदा हमरा सभकेँ पाइ नहि देबय पड़ल छल आ’ ताहि द्वारे गोबरो नहि काढ़य पड़ैत अछि, कारण कनियाँ ओतेक दुलारू नहि अछि”।
एक बेर बच्चा बाबूक ओहिठाम गेलाह मीत भाइ। ओ’ पैघ लोक आ’ तेँ बड्ड कँजूस। पहिने तँ सर्दमे गुरसँ होएबला लाभक चर्च कएलन्हि, जे ई ठेही हँटबैत अछि आ’ फेर गूरक चाह पीबाक आग्रह। मुदा मीत भाए कहि देलखिन्ह जे गुरक चाह तँ हुनको बड्ड नीक लगैत छन्हि, मुदा परुकाँ जे पुरी जगन्नाथजी गेल छलाह से कोनो एकटा फल छोड़बाक छलन्हि से कुसियार छोड़ि देलन्हि, आ’ तकरेसँ तँ गुर बनैत छैक। ओहि समयमे चुकन्दरक पातर रसियन चीनी अबैत छल, से बच्चा बाबूकेँ तकर चाह पिआबय पड़लन्हि।
किछु दिन पहिने बच्चा बाबू एहि गपक चर्च कएने छलाह जे ओ’ जोमनी छोड़्ने छलाह तीर्थस्थानमे आ’ तैँ जोम खाइत छलाह। हरजे की एहिमे। मीत भाइ खूब जबाब देलन्हि ऐ बेर एहि बातक। अधिक फलम् डूबाडूबी।
-----------------------------------------------------------------------
मीत भाइक बेटा भागि गेलन्हि। पुछला पर कोढ़ फाटि जाइत छलन्हि।
“यौ, लाल काका बियाह तँ करा’ देलन्हि, मुदा तखन ई कहाँ कहलन्हि जे बियाहक बाद बेटो होइत छैक”।
आब मीत भाइ बेटाकेँ ताकए लेल आ’ अपना लेल नोकरी सेहो दिल्लीक रस्ता धेलन्हि।
मुदा एहि बेर तँ मीत भाइ फेरमे पड़ि गेलाह। जखने दरभंगासँ ट्रेन आगू बढ़ल तँ सरस्वती मंद पड़ए लगलन्हि। कनेक ट्रेन आगू बढ़ल तँ एकटा बूढ़ी आबि गेलीह, मीत भाइकेँ बचहोन्ह देखलन्हि तँ कहए लगलीह
“बौआ कनेक सीट नञि छोड़ि देब”।
तँ मीत भाइ जबाब देलखिन्ह,
“माँ। ई बौआ नहि। बौआक तीन टा बौआ”।
आ’ बूढ़ी फेर सीट छोड़बाक लेल नहि कहलखिन्ह।
मीत भाइ मुगलसराय पहुँचैत पहुँचैत शिथिल भए गेलाह। तखने पुलिस आयल बोगीमे आ’ मीत भाइक झोड़ा-झपटा सभ देखए लगलन्हि। ताहिमे किछु नहि भेटलैक ओकरा सभकेँ। हँ खेसारी सागक बिड़िया बना कए कनियाँ सनेसक हेतु देने रहथिन्ह लाल काकीक हेतु। मुदा पुलिसबा सभ लोकि लेलकन्हि।
”ई की छी”।
”ई तँ सरकार, छी खेसारीक बिड़िया”।
”अच्छा, बेकूफ बुझैत छी हमरा। मोहन सिंह बताऊ तँ ई की छी”।
” गाजा छैक सरकार। गजेरी बुझाइत अछि ई”।
”आब कहू यौ सवारी। हम तँ मोहन सिंहकेँ नहि कहलियैक, जे ई गाजा छी। मुदा जेँ तँ ई छी गाजा, तेँ मोहन सिंह से कहलक”।
”सरकार छियैक तँ ई बिड़िया, हमर कनियाँ सनेस बन्हलक अछि लाल काकीक..........”
” ल’ चलू एकरा जेलमे सभटा कहि देत”। मोहन सिंह कड़कल।
मीत भाइक आँखिसँ दहो-बहो नोर बहय लगलन्हि। मुदा सिपाही छल बुझनुक। पुछलक
“कतेक पाइ अछि सँगमे”।
दिल्लीमे स्टेशनसँ लालकाकाक घर धरि दू बस बदलि कए जाए पड़ैत छैक। से सभ हिसाब लगा’ कए बीस टाका छोड़ि कए पुलिसबा सभटा ल’ लेलकन्हि। हँ खेसारीक बिड़िया धरि छोड़ि देलकन्हि।
तखन कोहुनाकेँ लाल काकाक घर पहुँचलाह मीत भाइ।
मुदा रहैत रहथि, रहैत रहथि की सभटा गप सोचा जाइत छलन्हि आ’ कोढ़ फाटि जाइत छलन्हि। तावत गामसँ खबरि अएलन्हि जे बेटा गाम पर पहुँचि गेलन्हि। लाल काकी लग सप्पथ खएलन्हि मीत भाइ जे आब पसीधक काँट बला हँसी नहि करताह। “नोकरी-तोकरी नहि होयत काकी हमरासँ” ई कहि मीत भाइ गाम घुरि कए जाय लेल तैयार भ’ गेलाह।
c)२००८. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ’ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।
विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.co.in केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx आ’ .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।
(c) २०००-२०२२ भालसरिक गाछ/ विदेह इन्टरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थिति
(c) २०००-२०२२ सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/bhalsarik-gachh/, http://www.geocities.com/ggajendra , http://www.geocities.com/gajendrathakur/ आदि लिंकपर आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha 258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर) केर रूपमे इन्टरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितक रूपमे विद्यमान अछि। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ "विदेह" पड़लै।इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA
स्थायी स्तम्भ जेना मिथिला-रत्न, मिथिलाक खोज, विदेह पेटार आ सूचना-संपर्क-अन्वेषण सभ अंकमे समान अछि, ताहि हेतु ई सभ स्तम्भ सभ अंकमे नइ देल जाइत अछि, ई सभ स्तम्भ देखबा लेल क्लिक करू नीचाँ देल विदेहक 346म आ 347 म अंक, ऐ दुनू अंकमे सम्मिलित रूपेँ ई सभ स्तम्भ देल गेल अछि।
|
“विदेह” ई-पत्रिका: देवनागरी वर्सन |
“विदेह” ई-पत्रिका: मिथिलाक्षर वर्सन |
“विदेह” ई-पत्रिका: मैथिली-IPA वर्सन |
“विदेह” ई-पत्रिका: मैथिली-ब्रेल वर्सन |
(c)२०००-२०२२. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: डॉ उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: राम विलास साहु, नन्द विलास राय, सन्दीप कुमार साफी आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल। सम्पादक -स्त्री कोना- इरा मल्लिक।
रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि,'विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि
Search This Blog
विदेह फाइल
विदेह ई-पत्रिका ई पत्र द्वारा : Videha RSS Feed
रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार ऐ ई-पत्रिकाकेँ छैै, आ से हानि-लाभ रहित आधारपर छै आ तैँ ऐ लेल कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह।। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। वि दे ह विदेह Videha বিদেহhttp://www.videha.co.in/ विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA.
पहिल मैथिली ब्लॉगक आर्काइव
-
▼
2008
(405)
-
▼
July
(340)
-
▼
Jul 27
(69)
- 'विदेह' ०१ जून २००८ ( वर्ष १ मास ६ अंक ११ )
- विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक ११ १. नाटक श्री...
- विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक ११ २.शोध लेखमा...
- विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक ११ ३.उपन्यास सह...
- विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक ११ ४.महाकाव्य ...
- विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक ११ ५. कथा११.संगीत
- विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक ११ ६. पद्य स्व. ...
- विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक ११ 7. संस्कृत ...
- विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक ११ ८. मिथिला कला...
- विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक ११ ९. पाबनि संस...
- विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक ११ १०. संगीत शिक...
- विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक ११ ११. बालानां ...
- विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक ११ १२. पञ्जी प्...
- विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक ११ १३. संस्कृत म...
- विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक ११ १४.मैथिली भा...
- विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक ११ १५. रचना ले...
- 'विदेह' ०१ जून २००८ ( वर्ष १ मास ६ अंक ११ )१६. VID...
- विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक १०
- विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक १० १. नाटक/ नो...
- विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक १० २.शोध लेखमाय...
- विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक १० ३.उपन्यास सह...
- विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक १० ४.महाकाव्य ...
- विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक १० ५. कथा १०.फ...
- विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक १० ६. पद्यस्व. ...
- विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक १० ७. संस्कृत ...
- विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक १० ८. मिथिला क...
- विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक १० ९. पाबनि वट...
- विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक १० ११. बालानां...
- विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक १० १२. पञ्जी प...
- विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक १० १३. संस्कृत...
- विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक १० १४.मैथिली भाष...
- विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक १० १५. रचना लेख...
- विदेह १५ मई २००८ वर्ष १ मास ५ अंक १० १६. VID...
- विदेह 01 मई 2008 वर्ष 1 मास 5 अंक 9
- विदेह 01 मई 2008 वर्ष 1 मास 5 अंक 9 1. नाटकश्री ...
- विदेह 01 मई 2008 वर्ष 1 मास 5 अंक 9 2.शोध लेखमाय...
- विदेह 01 मई 2008 वर्ष 1 मास 5 अंक 9 3.उपन्यास सहस...
- विदेह 01 मई 2008 वर्ष 1 मास 5 अंक 9 4.महाकाव्य ...
- विदेह 01 मई 2008 वर्ष 1 मास 5 अंक 9 5. कथा9.पसीध...
- विदेह 01 मई 2008 वर्ष 1 मास 5 अंक 9 6. पद्य अ.पद्...
- विदेह 01 मई 2008 वर्ष 1 मास 5 अंक 9 7. संस्कृत शिक...
- विदेह 01 मई 2008 वर्ष 1 मास 5 अंक 9 8. मिथिला क...
- विदेह 01 मई 2008 वर्ष 1 मास 5 अंक 9 9. पाबनि न...
- विदेह 01 मई 2008 वर्ष 1 मास 5 अंक 9 10. संगीत शिक...
- विदेह 01 मई 2008 वर्ष 1 मास 5 अंक 9 11. बालानां ...
- विदेह 01 मई 2008 वर्ष 1 मास 5 अंक 9 12. पञ्जी प्रब...
- विदेह 01 मई 2008 वर्ष 1 मास 5 अंक 9 13. संस्कृत म...
- विदेह 01 मई 2008 वर्ष 1 मास 5 अंक 9 14. मैथिली भ...
- विदेह 01 मई 2008 वर्ष 1 मास 5 अंक 9 15. रचना लेख...
- विदेह 01 मई 2008 वर्ष 1 मास 5 अंक 9 16.पोथी समीक...
- विदेह 01 मई 2008 वर्ष 1 मास 5 अंक 917. VIDEHA ...
- विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 8
- विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 8 1.मैथिली म...
- विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 8 2. नाटक श्...
- विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक3.शोध लेख माय...
- विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 8 4.उपन्यास...
- विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 8 5.महाकाव्य...
- विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 8 6. कथा 8.भ...
- विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 8 7. पद्य
- विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 8 8. संस्कृ...
- विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 8 9. मिथिला ...
- विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 8 12. पञ्जी ...
- विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 8 13. संस्कृ...
- विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 8 14. मैथि...
- विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 8 15. रचना ...
- विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 816. VIDEHA ...
- विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 8 17. मैथिली...
- विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 8 18. मिथिला...
- विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 8 19..मि...
-
▼
Jul 27
(69)
-
▼
July
(340)
No comments:
Post a Comment